सामने हो पर फासले कुछ खाई से नज़र आते है,
अल्फ़ाज़ आते है दिमाग से पर ज़बान पर आने से सुख जाते है सारे ।
हाँ दरारें है कुछ उस सुखी मिट्टी की तरह् जो
कुछ बुँदे पानी की गिरने से भर जाती ह,
चले दो कदम साथ फिरसे ? शायद कुछ पानी बरस जाए और मिट्टी भीग जाए --
चिरायु