सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

इझहारे इश्क़

अब इझहारे इश्क़ लब्जो मे कयू हो ?
जब आखो कि सियाही ने हि दास्तान लिख दि है दिल की
अब क्यू हो यू परदा तेरे मेरे बीच.
जब तुम ने धड्कनो से ही बात सून ली है !!!!!

वजह

रात भर बारीश होती राही और तुम याद आती रही
बोतल बंद शराब भी खत्म होने को आई फिर भी तुम याद आती रही
आज भी पानी वही रुका हूआ  हे  और राह भी कोई मुझे नझर न आई
लौट आने के लिये एक वजह ही काफी हे
क्या तुम्हे भूला नही पाना ये काफी नही ?