गम-ए-जिंदगी इस कदर बढे की सारे मयखाने हम पि गए,
हर जाम दर जाम गमो को निगल गए I
इस तरह से पिघले ए जालिम की मोम भी रो दिए I
बस इन् जुल्फों मे कायनात ढूंढ़ ली है मैंने,
मदहोशी है आलम में आज, मत ठुकराओ अब हमे की
हमने तुम्हे प्यार करने का एक और बहाना ढूढ़ लिया है!!!
इस रेगिस्तान से दिल में तुमने आते ही कुछ फूल खिला दिए थे,
देखो आज इन पर कुछ भंवरे भी गुनगुनाने लगे थे, काश तुम भी ये महसूस कर पाते
जो मेरे दिल ने खुशबू महसूस की है !!
कई यादो में बसरकर गुज़रती है ज़िन्दगी ,
कही खयालो में दुबे उस मंज़र से गुजरती है ज़िन्दगी,
हवाओ सी रिश्तो में घुलती है ज़िन्दगी,
फूलो की खुशबू का अहेसास है ज़िन्दगी,
नीले समन्दर की गहराई है ज़िन्दगी,
कसी की मोहोबत में फ़ना है ज़िन्दगी,