आज मेरे कमरे कि वो खिड़की खोल दी जो कुछ वक़्त पहले मैंने बंद कर रखी थी,
खोलकर देखा बहार तो कई इमारते खड़ी हो गई थी, कई शक्ले बिलकुल बदल चुकी थी
पहले रोज अच्छी हवा चलती थी अब तो घुटन सी महसूस हुई I
मैंने इस खिड़की से कई बार उस सूरज को उगते भी देखा था और आज ढलने की शक्ल
भी नही दिखाता,
बस एहसास हुआ कि वो खिड़की ही नहीं मैंने एक बदलाव खोल दिया हो जैसे I
खोलकर देखा बहार तो कई इमारते खड़ी हो गई थी, कई शक्ले बिलकुल बदल चुकी थी
पहले रोज अच्छी हवा चलती थी अब तो घुटन सी महसूस हुई I
मैंने इस खिड़की से कई बार उस सूरज को उगते भी देखा था और आज ढलने की शक्ल
भी नही दिखाता,
बस एहसास हुआ कि वो खिड़की ही नहीं मैंने एक बदलाव खोल दिया हो जैसे I


