बुधवार, 27 नवंबर 2013

बदलाव

आज मेरे कमरे कि वो खिड़की खोल दी जो कुछ वक़्त पहले मैंने बंद कर रखी थी,
खोलकर देखा बहार तो कई इमारते खड़ी  हो गई थी, कई शक्ले बिलकुल बदल चुकी थी
पहले रोज अच्छी हवा चलती थी अब तो घुटन सी महसूस हुई I
मैंने इस खिड़की से कई बार उस सूरज को उगते भी देखा था और आज ढलने की शक्ल
भी नही दिखाता,
बस एहसास हुआ कि वो खिड़की ही नहीं मैंने एक बदलाव खोल दिया हो जैसे I

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

चुनावी रोटी

कही चुनावी खोखले दावों में फ़सी पड़ी है रोटी
कही सियासी गलियारों में अटकी हुई है रोटी
रात हुई जब छोटू ने अपनी माँ से मांगी रोटी
तो माँ ने आज भी कटोरी में चाँद दिखाया छोटू को
और छोटा सा टुकड़ा खिलाकर सुला दिया .....

बुधवार, 7 अगस्त 2013

"मिट्टी"

लोग केहते है की में किसी अलग मिट्टी का बना हू।
मैं इनकार करता हू,
क्यूंकि मिट्टी तो वही है जिस्से बाकि इंसा बने है,
बस फर्क इतना है की वक़्त ने मेरी रूह को खूब तापा है !!!!

मंगलवार, 2 जुलाई 2013

Mazaar....

एक आँख  मसलती सुबह का मंज़र था, नकाब कोश कोई करीब आ रहा था
ठीक से देख नहीं पाया उसे शायद गहरी नींद सो रहा था या कोहरे की बदोलत नज़र धुन्दला कर गई थी
पर जब नज़रे साफ़ हुई तो मजार पर कुछ फूल बिखरे पड़े थे और कोई अपने अश्क भी छोड़ गया थ…

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

इझहारे इश्क़

अब इझहारे इश्क़ लब्जो मे कयू हो ?
जब आखो कि सियाही ने हि दास्तान लिख दि है दिल की
अब क्यू हो यू परदा तेरे मेरे बीच.
जब तुम ने धड्कनो से ही बात सून ली है !!!!!

वजह

रात भर बारीश होती राही और तुम याद आती रही
बोतल बंद शराब भी खत्म होने को आई फिर भी तुम याद आती रही
आज भी पानी वही रुका हूआ  हे  और राह भी कोई मुझे नझर न आई
लौट आने के लिये एक वजह ही काफी हे
क्या तुम्हे भूला नही पाना ये काफी नही ?