रात भर बारीश होती राही और तुम याद आती रही
बोतल बंद शराब भी खत्म होने को आई फिर भी तुम याद आती रही
आज भी पानी वही रुका हूआ हे और राह भी कोई मुझे नझर न आई
लौट आने के लिये एक वजह ही काफी हे
क्या तुम्हे भूला नही पाना ये काफी नही ?
बोतल बंद शराब भी खत्म होने को आई फिर भी तुम याद आती रही
आज भी पानी वही रुका हूआ हे और राह भी कोई मुझे नझर न आई
लौट आने के लिये एक वजह ही काफी हे
क्या तुम्हे भूला नही पाना ये काफी नही ?
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