"Dastakhat"
मंगलवार, 3 सितंबर 2013
चुनावी रोटी
कही चुनावी खोखले दावों में फ़सी पड़ी है रोटी
कही सियासी गलियारों में अटकी हुई है रोटी
रात हुई जब छोटू ने अपनी माँ से मांगी रोटी
तो माँ ने आज भी कटोरी में चाँद दिखाया छोटू को
और छोटा सा टुकड़ा खिलाकर सुला दिया .....
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